‘’भैंस बंधी है ओरछा, पड़ा होशंगाबाद, लगवैया है सागरे, चपिया रेवा पार...’’

About Us / बुन्देलखण्ड लिट्रेचर फेस्टिवल के बारे में

बुन्देलखण्ड, इतिहास और संस्कृति का अनमोल खजाना, वीरता और लोकधरोहरों की भूमि है। इसकी मिट्टी में साहित्य की महक है, लोककथाएं, गीत और कविताएं जीवन की भावनाओं को संजोती हैं। यहाँ का साहित्य समाज को जोड़ता, संवेदनशील बनाता और नई पीढ़ी को अपने मूल से परिचित कराता है।

बुन्देलखण्ड सदैव ही  तपोभूमि, वीर भूमि और साहित्य की भूमि रहा  है। बुन्देलखण्ड की माटी ने ऐसी विभूतियाँ दी हैं, जिन्होंने समाज, कला और संस्कृति में अमूल्य योगदान देकर इतिहास में अपना नाम अमर किया। इसी बुन्देलखण्ड के उत्थान, बुंदेली को जन-जन तक पहुँचाने और गौरवशाली संस्कृति की पहुंच विकसित करने के लिए कार्यरत है।

बुन्देलखण्ड लिटरेचर फेस्टिवल केवल एक साहित्यिक आयोजन भर नहीं है। यह उस मिट्टी की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव है, जिसने सदियों से शब्दों, लोकधुनों और वीरगाथाओं को अपने आंचल में सहेज कर रखा है। यह वह मंच है जहां बुन्देलखण्ड की लोकचेतना आधुनिक विचारों से संवाद करती है और परंपरा नए समय के साथ कदम मिलाकर चलती दिखाई देती है।

बीएलएफ साहित्य, कला, संगीत, सिनेमा, लोकसंस्कृति और सामाजिक सरोकारों का ऐसा संगम है, जहां शब्द केवल पढ़े नहीं जाते बल्कि महसूस किए जाते हैं। क्योंकि यह ‘उत्सव कहानी और उनके किरदारों का’ यहाँ कविता लोकगीतों की तरह बहती है, कहानियाँ इतिहास की तरह जीवित हो उठती हैं और संवाद समाज के भीतर नई चेतना जगाते हैं। झांसी की ऐतिहासिक धरती पर आयोजित यह महोत्सव बुन्देलखण्ड की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सतत प्रयास है।

यहाँ साहित्यिक सृजन से लेकर बुंदेली साहित्य के भविष्य तक, कलाओं के उद्गम से लेकर उनकी पराकाष्ठाओं तक एवं संस्कृतियों की अनूठी मिसालों का अनूठा संगम देखने को मिलता है। यह एक ऐसा उत्सव है, जहाँ विद्वान साहित्यकारों से लेकर आज वर्तमान व आने वाली युवा पीढ़ी के साहित्यकारों तक सभी एक साथ बुन्देलखण्ड की इस पावन धरा की गरिमा को ऐसे ही अमूल्य बनाये रखने की भरसक कोशिश करते है। केवल इतना ही नहीं अन्य विचारधाराओं के प्रति सहिष्णुता बुंदेली संस्कृति की विशेषता रही है और बुंदेली संस्कृति पूर्ण रूपेण ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना से ओत-प्रोत है। बुन्देलखण्ड झाँसी की रानी के साथ ही, उन साधारण स्त्रियों की दास्तान भी दर्ज करता है जो मेहनत और लगन में अपनी बहादुरी की इबारत रखती हैं।

इस महोत्सव की सबसे बड़ी खूबी इसकी आत्मीयता है। लोकभाषा बुंदेली की मिठास, लोककला की रंगत, विचारों की गंभीरता और रचनात्मकता की ऊर्जा मिलकर बीएलएफ को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक आंदोलन बना देती है।

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