Season 1
बुन्देलखण्ड साहित्य महोत्सव का आरंभ इतना व्यापक और सफल करने के बाद अब बारी थी दूसरी बार इसे और भी बेहतर ढंग से करने की। शायद इसी की बेहतरी को कायम रखने के लिए हमने कई इंतेजाम किए। ना सिर्फ अतिथियों को न्यौता भेजा बल्कि उनके सारे कार्यक्रम की रूपरेखा भी तय कर ली। इसे जनवरी में किया जाना था, लेकिन हाल ही में निकले कोरोना के कारण ये संभव ना हो पाया। पर कहते हैं ना होइये वही जो राम रचि राखा। राम जी ने तो कुछ और ही रचा।
कहते हैं कि व्यक्ति का यदि जुड़ाव उसकी मिट्टी से होता है, तो उसका व्यक्तित्व रूपी वृक्ष खूब फलता-फूलता है। इसी प्रयास में बुन्देलखण्ड की सरजमीं पर 14, 15, 16 अक्टूबर को बुन्देलखण्ड लिटरेचर फेस्टिवल का सफल आयोजन हुआ। बुंदेलखंडी का ये मेला सारे अनुमानों को नकरता हुआ, हमारी उम्मीद से भी अच्छा हुआ। इसे हमने बुन्देलखण्ड विश्वविद्धयालय झांसी में किया। इतना ही नहीं हमने यहां 2 हॉलों की भी व्यावस्था की। ये दोनों ही हॉल बुंदेलखंडी संस्कृति की अलग छटा विखेर रहे थे। इसमें बुंदेलखंडी प्रेमी और साहित्य, कला आदि से संबंधित प्रख्यात जन का जमावड़ा लगा, जो बेहद ही आकर्षक था।
बुन्देलखण्ड साहित्य महोत्सव के पहले सफल आयोजन के बाद वर्ष 2022 में इसका दूसरा भव्य संस्करण 14, 15 और 16 अक्टूबर को बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी में आयोजित किया गया। कोरोना महामारी के कारण पूर्व निर्धारित कार्यक्रम स्थगित होने के बाद यह आयोजन और अधिक व्यापक रूप में सामने आया। तीन दिनों तक चले इस महोत्सव में साहित्य, सिनेमा, मीडिया, लोकसंस्कृति, पत्रकारिता और रंगमंच से जुड़े विषयों पर गंभीर संवाद हुए। विश्वविद्यालय परिसर में बने “अथाई” और “मड़ा” हॉल बुंदेलखंडी संस्कृति की अलग पहचान प्रस्तुत कर रहे थे।
महोत्सव के पहले दिन बुंदेली भाषा, स्त्री विमर्श, मीडिया, लोकसंस्कृति और सिनेमा पर केंद्रित सत्र आयोजित हुए। “बुंदेली भाषा: बोलेंगे तो सुनी जाएगी” और “देहरी पर खड़ी स्त्री” जैसे सत्र विशेष आकर्षण रहे। शाम को “एक है अमृता” नाटक के मंचन ने दर्शकों को भावुक कर दिया। दूसरे दिन किन्नर विमर्श, पत्रकारिता, बाजारवाद, जल संरक्षण, साहित्य और सिनेमा पर चर्चाएं हुईं। “गोली और ग़ज़ल” तथा “डिजिटल समय में प्रिंट मीडिया का भविष्य” जैसे सत्रों ने युवाओं को विशेष रूप से प्रभावित किया। तीसरे दिन थिएटर, पॉडकास्ट, डिजिटल पत्रकारिता, बाल साहित्य, सिनेमा और वाचिक परंपरा पर संवाद हुए।
तीनों दिनों में अथाई मंडप विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जहां लेखकों और कलाकारों ने सीधे युवाओं और श्रोताओं से संवाद किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोकनृत्य, नाटक, ग़ज़ल, कव्वाली और बुंदेली लोक प्रस्तुतियों ने आयोजन को जीवंत बनाए रखा। पुस्तक विमोचन, कहानी पाठ, कविता पाठ और पुस्तक मेले ने साहित्य प्रेमियों को एक अलग अनुभव दिया।
महोत्सव में मैत्रेयी पुष्पा, आलोक धन्वा, नरेश सक्सेना, महेंद्र भीष्म, गीतिका वेदिका, नवीन चौधरी, पंकज चतुर्वेदी, सईद अंसारी, दीपक दुआ, गौतम राजऋषि, सत्य व्यास, संजय द्विवेदी, सर्वेश अस्थाना, प्रियदर्शन, राजीव सक्सेना, अभिषेक सिंह, कमलेश कमल, सोनरूपा विशाल, गिरीश पंकज, विवेक मिश्र, जयंती रंगनाथन, निधि अग्रवाल, चिराग जैन, रणविजय, मृदुल कपिल, भगवंत अनमोल, पल्लवी महाजन, प्रवीण अग्रहरि और ऋतु दुबे तिवारी सहित साहित्य, पत्रकारिता और कला जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने सहभागिता की।
विशेष आकर्षणों में अथाई मंडप, पुस्तक मेला, बुंदेली लोकसंस्कृति आधारित प्रस्तुतियां, युवा संवाद, कहानी पाठ, कविता पाठ और ओपन इंटरैक्टिव सत्र शामिल रहे। राजकमल प्रकाशन, नेशनल बुक ट्रस्ट, वाणी प्रकाशन सहित देश के कई प्रमुख प्रकाशन संस्थानों ने पुस्तक प्रदर्शनी में भाग लिया।
आयोजक:
बुन्देलखण्ड लिटरेचर फेस्ट सोसाइटी, झांसी
रेडियो पार्टनर:
92.7 बिग एफएम
रचनात्मक सहयोगी:
तीखर, च से चकल्लस, ताओ इवेंट्स, रफ कॉपी
सोशल मीडिया सहयोगी:
हिन्दीनामा, हिंदी पंक्तियां, ह्यूमन्स ऑफ झांसी, डूडिलंग वर्ड्स, बुकवाला












