Season 4
महोत्सव मेला और उत्सव के दिन फिर एक बार लौट आए फिर से अपने लाव-लश्कर के साथ साहित्य, कला एवं संस्कृति का अद्भुत शामियाना सजाने। एक बार फिर हुआ साहित्य, कला संस्कृति और सिनेमा का अद्भुत मेल, जहाँ गत उत्सव की तरह इस वर्ष भी सम्बंधित क्षेत्र से जुड़ी अनेकों नामचीन हस्तियों ने शिरकत की। अनुपम सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने अपनी छटा बिखेरी और फिर से बुन्देलखण्ड में साहित्य एवं कला की नीवं को और मजबूत करने के लिए किया गया बुन्देलखण्ड साहित्य महोत्सव का तीसरा सीजन का आयोजन।
झांसी में आयोजित बुन्देलखण्ड लिट्रेचर फेस्टिवल 3.0 ने एक बार फिर साहित्य, कला, संस्कृति और सिनेमा के रंगों से पूरे शहर को सराबोर कर दिया। तीन दिनों तक चले इस महोत्सव में देशभर से आए साहित्यकारों, पत्रकारों, कलाकारों, अभिनेताओं, शिक्षाविदों और युवाओं ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय परिसर में सजे इस महोत्सव ने बुंदेली संस्कृति, लोकभाषा और समकालीन विमर्शों को एक साथ मंच प्रदान किया।
महोत्सव के पहले दिन साहित्य, समाज, पुलिस प्रशासन, नेतृत्व, बुन्देलखण्ड की सांस्कृतिक विरासत और युवाओं के स्टार्टअप जैसे विषयों पर चर्चाएं हुईं। लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज सिन्हा ने शौर्य और संवेदनाओं से जुड़े अनुभव साझा किए, जबकि प्रियंका गुप्ता ने संघर्ष और आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी सुनाई। राम मोहन शर्मा ने रामकथा के सांस्कृतिक प्रभावों पर बात की।
दूसरे दिन के सत्रों में साहित्य, समाज, संस्कृत, यूपीएससी, ओटीटी और अभिनय की दुनिया पर संवाद हुए। अदिति पटेल ने सिविल सेवा की चुनौतियों और तैयारी पर युवाओं को मार्गदर्शन दिया। अभिनेत्री शुभांगी लिटोरिया और अभिनेता अशोक पाठक ने अभिनय जगत के अनुभव साझा किए। वहीं शशांक गर्ग, वंदना अवस्थी दुबे और अनिरुद्ध रावत जैसे वक्ताओं ने साहित्य और समाज के बदलते स्वरूप पर विचार रखे।
अंतिम दिन हरिवंश नारायण सिंह ने हिंदी पत्रकारिता और साहित्य के बदलते स्वरूप पर विचार व्यक्त किए। सईद अंसारी ने मीडिया और जनता के रिश्तों पर बेबाक चर्चा की। अभिनेता अखिलेन्द्र मिश्रा ने अभिनय यात्रा और सिनेमा के बदलते आयामों को साझा किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। बॉलीवुड बैंड प्रस्तुतियां, डांस परफॉर्मेंस, लोकधुनों और मंचीय प्रस्तुतियों ने युवाओं और दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। कला प्रदर्शनी में कैनवास पेंटिंग, स्टोन आर्ट, वुड आर्ट, नेल आर्ट और हस्तनिर्मित कलाकृतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। पुस्तक प्रदर्शनियों और स्थानीय कला स्टॉलों ने भी लोगों का ध्यान खींचा।
महोत्सव में हरिवंश नारायण सिंह (उपसभापति, राज्यसभा), सईद अंसारी (एंकर, आजतक), पंकज चतुर्वेदी (लेखक एवं स्तंभकार), गौतम राजऋषि (कवि एवं सैन्याधिकारी), प्रियंका गुप्ता (ग्रेजुएट चाय वाली), मनोज सिन्हा (सैन्याधिकारी, अभिनेता, लेखक), जयदीप कर्णिक (संपादक, अमर उजाला डिजिटल), दीपक मशाल (कवि एवं लेखक), शशांक गर्ग (आईपीएस लेखक), शुभांगी लिटोरिया (अभिनेत्री), अशोक पाठक (अभिनेता), तरुण भटनागर (आईएएस एवं कथाकार), नाज जोशी (मिस इंडिया), राजेश पाण्डेय (पूर्व आईपीएस), राम मोहन शर्मा (पत्रकार) सहित अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने सहभागिता की।
बुन्देलखण्ड लिट्रेचर फेस्टिवल 3.0 ने एक बार फिर यह साबित किया कि बुन्देलखण्ड की साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना आज भी उतनी ही जीवंत, व्यापक और ऊर्जावान है।
अथिति
- हरिवंश जी (उपसभापति, राज्यसभा)
- प्रियंका गुप्ता (ग्रेजुएट चाय वाली)
- पंकज चतुर्वेदी (लेखक, स्तंभकार)
- सईद अंसारी (एंकर आजतक)
- मनोज सिन्हा (सैन्याधिकारी, अभिनेता, लेखक)
- जयदीप कर्णिक (संपादक- अमर उजाला, डिजिटल)
- गौतम राजऋषि (कवि, सैन्याधिकारी)
- दीपक मशाल (कवि, लेखक)
- पवन कुमार (आई ए एस लेखक)
- वंदना अवस्थी दुबे (लेखक)
- शशांक गर्ग (आई पी एस लेखक)
- रंजन कुमार (दिल्ली विश्वविद्यालय प्रोफेस)
- शुभांगी लिटोरिया (अभिनेत्री)
- राजेश कुमार मिश्रा (आई पी एस कवि, लेखक)
- संतोष कुमार (आई पी एस)
- रजनी सिंह (इंस्पेक्टर)
- ऋतु दुबे तिवारी (प्रिंसिपल निस्कोर्ट मीडिया कॉलेज)
- डॉ मुन्ना पांडेय (लेखक)
- नाज जोशी (मिस इंडिया)
- अशोक पाठक (अभिनेता)
- राजेश पांडेय (पूर्व आईपीएस)
- धीरेंद्र राय (संपादक आई चोक)
- अगम जैन (आई पी एस लेखक)
- तरुण भटनागर (आई ए एस कथाकार)
- अखिलेन्द्र (कवि अभिनेता)
- अदिति पटेल (सिविल सेवक)
- राम मोहन शर्मा (पत्रकार)

















































