Season 6
झांसी के जनरल विपिन रावत शहीद पार्क में आयोजित बुन्देलखण्ड लिट्रेचर फेस्टिवल 5.0 तीन दिनों तक चलने वाले साहित्य, संस्कृति, कला और सिनेमा के जीवंत उत्सव। का आयोजन एक नए उत्साह और उमंग के साथ हुआ। झांसी किले की तलहटी में आयोजित इस महोत्सव में देशभर से आए साहित्यकारों, पत्रकारों, कलाकारों, अभिनेताओं, शिक्षाविदों और युवाओं ने भाग लिया। वैदिक मंगलाचार से शुरू हुए इस आयोजन में विचार, संवाद और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का अनूठा संगम देखने को मिला।
फेस्टिवल के विभिन्न सत्रों में साहित्य, मीडिया, लोकतंत्र, शिक्षा, अभिनय, लोकसंस्कृति, खेल, यात्रा, अध्यात्म और समाज से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। साथ ही, इस बार कार्यक्रम में ‘कला की समृद्धि’ विषय पर विशेष प्रदर्शनी आयोजित की गई जिनमें बुन्देलखण्ड की लोककला, हस्तशिल्प और पारंपरिक शिल्पकला की प्रदर्शनी हुई। वरिष्ठ पत्रकार ऋचा अनिरुद्ध ने युवाओं को बड़े सपने देखने और मेहनत से कभी न घबराने की प्रेरणा दी। प्रो. बलराम पाणि ने शिक्षा के साथ अच्छे नागरिक बनने पर जोर दिया, जबकि नितिन प्रमोद ने स्थानीय साहित्य और भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने की बात कही। अभिनेत्री श्रेया गुप्ता, निधि बिष्ट, अभिनेता प्रियांशु पैन्युली, फैसल मलिक और श्रीकांत वर्मा ने अभिनय जगत के संघर्षों और अनुभवों को साझा करते हुए युवाओं को धैर्य और निरंतर प्रयास का संदेश दिया।
दूसरे दिन के सत्रों में साहित्य, कला और सिनेमा को केंद्र में रखकर संवाद हुए। साहित्यकार त्रिलोक नाथ पांडेय ने काशी की सांस्कृतिक विरासत पर चर्चा की जबकि स्कल्पचर आर्टिस्ट अभिषेक कुमार सिंह ने लोककलाओं को जीवन का हिस्सा बनाने की जरूरत बताई। पद्मश्री शोभना नारायण ने साधना, अनुशासन और समय प्रबंधन को सफलता का आधार बताया। फिल्म निर्देशक तरुण डुडेजा ने साहित्य और सिनेमा के संबंधों पर अपने अनुभव साझा किए। वहीं अभिनेत्री निधि बिष्ट ने युवाओं, खासकर लड़कियों को अपने पैशन के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी।
अंतिम दिन खेल, यात्रा, साहित्य, जनजातीय संस्कृति और अभिनय से जुड़े सत्र आकर्षण का केंद्र रहे। अर्जुन अवॉर्डी रचना गोविल और पूर्व क्रिकेटर अरविंद कपूर ने खेलों में अनुशासन और निरंतर मेहनत की अहमियत बताई। ट्रैवलर राहुल नील और कायनात काजी ने यात्राओं को आत्मखोज का माध्यम बताया। सत्यार्थ अनिरुद्ध और दीपक मशाल ने साहित्य को समाज से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। अभिनेता श्रीकांत वर्मा ने कहा कि सिद्धि हासिल होने पर प्रसिद्धि स्वयं मिल जाती है।
कार्यक्रम में नवरस बुंदेली लोक कला समिति द्वारा आल्हा गायन, नृतक रवि प्रताप सिंह द्वारा कथक और विशाल सागर ब्रदर्स ग्रुप संगीत प्रस्तुतियों ने दर्शकों को अपनी लोकसंस्कृति से जोड़कर रखा। पुस्तक स्टॉल, कैलीग्राफी, कला प्रदर्शनियां और स्थानीय व्यंजनों ने भी लोगों को आकर्षित किया। निबंध और पेंटिंग प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया, वहीं विभिन्न पुस्तकों का लोकार्पण भी हुआ।
तीन दिनों तक चला यह महोत्सव झांसी में साहित्य और संस्कृति के प्रति लोगों के उत्साह का साक्षी बना। बड़ी संख्या में पहुंचे शहरवासियों, विद्यार्थियों और युवाओं ने सत्रों में भाग लेकर संवाद किया और यह साबित किया कि बुन्देलखण्ड की सांस्कृतिक चेतना आज भी उतनी ही जीवंत है।
हमारे गणमान्य अतिथि:
- डॉ. रहीस सिंह जी – (लेखक, मीडिया सलाहकार, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार)
- कर्नल श्री सुकेश वर्मा जी, शौर्य चक्र – (भारतीय सेना)
- विदुषी ऋचा अनिरुद्ध जी – (चर्चित पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता)
- श्री राम मोहन शर्मा जी – (वरिष्ठ पत्रकार, ज़ी न्यूज)
- श्री सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज जी – (आईपीएस अधिकारी, साहित्यकार)
- श्री त्रिलोक नाथ पाण्डेय जी – (वरिष्ठ साहित्यकार, वाराणसी)
- डॉ. मुन्ना कुमार पाण्डेय जी – (एसोसिएट प्रोफेसर, सत्यवती कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय)
- श्री संदीप मुरारका जी – (जनजातीय विषयों के लेखक एवं प्रेरक वक्ता)
- प्रो. बलराम पाणि जी – (डीन ऑफ कॉलेजेस, दिल्ली विश्वविद्यालय)
- प्रो. मुकेश पाण्डेय जी – (कुलपति, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय)
- श्री नितिन प्रमोद जी – (निदेशक, विदेश मंत्रालय, भारत सरकार)
- डॉ. अनिरुद्ध रावत जी – (साहित्यकार, शिक्षाविद)
- सुश्री साक्षी पटेरिया जी – (बुंदेली लोक गायिका)
- श्री जितेन्द्र चौरसिया जी – (आल्हा गायक)
- श्री अरिंदम घोष जी – (वरिष्ठ पत्रकार)
- प्रो. टी.के. शर्मा जी – (प्राचार्य, विपिन बिहारी कॉलेज)
- श्री अनमोल आहूजा जी – (कास्टिंग डायरेक्टर)
- डॉ. अनुपम व्यास जी – (एसोसिएट प्रोफेसर, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय)
- सुश्री श्रेया गुप्ता जी – (अभिनेत्री)
- श्री प्रियांशु पैन्युली जी – (अभिनेता)
- श्री वैभव मणि त्रिपाठी जी – (लेखक)
- श्री विवेक कुमार जैन जी – (वन अधिकारी, लेखक)
- श्री अभिषेक कुमार सिंह जी – (स्कल्पचर आर्टिस्ट)
- सुश्री आकांक्षा सिंह जी – (वारली आर्टिस्ट)
- श्री नीरज मिश्र जी – (वरिष्ठ पत्रकार)
- पद्मश्री शोभना नारायण जी – (प्रख्यात कथक नृत्यांगना)
- श्री तरुण डुडेजा जी – (फिल्म निर्देशक)
- डॉ. मनीष कुमार जैसल जी – (आईटीएम यूनिवर्सिटी, ग्वालियर)
- सुश्री निधि बिष्ट जी – (अभिनेत्री एवं फिल्म निर्माता)
- श्री फैसल मलिक जी – (अभिनेता)
- श्रीमती रचना गोविल जी – (अर्जुन अवॉर्डी एथलीट)
- श्री अरविंद कपूर जी – (पूर्व क्रिकेटर एवं कोच)
- श्री राहुल नील जी – (ट्रेवलर एवं लेखक)
- डॉ. कायनात काजी जी – (महिला सोलो ट्रैवलर)
- श्रीमती ऋतु भारद्वाज जी – (पत्रकार)
- श्री दीपक मशाल जी – (लेखक, साहित्यकार)
- श्री नितेश प्रसाद जी – (संपादक, अपनी हिंदी)
- श्रीमतिअंजु रंजन जी – (संयुक्त सचिव, विदेश मंत्रालय, भारत सरकार)
- आरजे शाहनवाज जी – (रेडियो जॉकी एवं मंच संचालक)
- श्री मुकुंद मल्होत्रा जी – (समाजसेवी)
- श्री देवेन्द्र सिंह जी – (इतिहासविद)
- श्री मति लीना पाणि जी- (लेखिका)
- श्री श्रीकान्त वर्मा जी- (अभिनेता)
- श्री त्रिलोक नाथ पाण्डेय जी- (वरिष्ठ साहित्यकार वाराणसी)
अन्य आकर्षण:
इस उत्सव की भव्यता को बनाए रखने के लिए विभिन्न कलात्मक गतिविधियाँ शामिल की गईं, और विशेष रूप से कुछ पंडाल भी लगाए गए। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- बुन्देली हस्तशिल्प और कला स्टॉल
- फूड कोर्ट
- बुन्देली स्वाद
- आर्ट एग्जिबिशन
- लाइव पेंटिंग
- फेस पेंटिंग
ओपन माइक (अथाई):
बुन्देलखंड लिट्रेचर फेस्टिवल 2026 में साहित्य, कला, सिनेमा, सेना और पत्रकारिता जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों ने सहभागिता की। तीन दिवसीय आयोजन में युवा कलाकारों को “अथाई” मंच के माध्यम से लेखन, संगीत, गायन और लोककला प्रस्तुत करने का अवसर मिला। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और संवादों ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
आयोजक:
बुन्देलखण्ड लिट्रेचर फेस्ट सोसाइटी, झांसी
सयोगी संस्थाएँ:
- अथाई
- विद्यादीप फाउण्डेशन
- बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय
- 92.7 बिग एफएम
- Book वाला